#हिम्मत_न _हारना

#हिम्मत_न_हारना 
हर तारीक रात के बाद एक पुरनूर सवेरा ज़रूर आता है।

ऐ मुसीबतज़दा लोगों अपने रब पर भरोसा रखो। 
वही रब रात को दिन में बदलता है । 
बीमारों को सेहत, बेऔलादों को औलाद और मोहताजों को रिज़्क़ अता करता है।
ये वही रब है जो कंगालों को मालामाल कर देता है, सूखे हुए दरिया में सैलाब ला देता है और ख़िज़ाँ (पतझड़) के बाद उजड़े हुए बागों को सरसब्ज़-ओ-शादाब कर देता है।

वही रब हर नाउम्मीदी में उम्मीद की किरण ज़ाहिर करता है, तूफानों में घिरे जहाज़ों को थामे रखता है और आंधियों में भी दियों को जलाए रखता है।
वो हर परेशानी के साथ आसानी ज़रूर भेजता है। तंगहाली को खुशहाली में वही बदलता है। उसकी रहमत से कभी मायूस मत होना। उसके यहां कुछ भी नामुमकिन नहीं , उसके कहने से ही मामले हो जाते हैं।
तू बस कोशिश करता जा।

किसी भी मुसीबत में टूट मत जाना, सब्र के कड़वे घूंट और अपने रब की याद के सहारे अपनी ज़िंदगी के सफ़र को जारी रखना।
दुखों का कोहरा छटेगा और राहत वाली ज़िंदगी तुम्हारा इंतज़ार कर रही होगी।
चंद नाकामियों के बाद ही टूट मत जाना।
ज़िंदगी नाम है हिम्मत के साथ जिए जाने का।
हिम्मत-ए-मर्दां  
मदद-ए-ख़ुदा ।

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